कृतिदेव और यूनिकोड में क्या अंतर है: पूरी जानकारी

संक्षिप्त उत्तर: सबसे बड़ा अंतर यह है कि यूनिकोड एक मानक अक्षर-कोडिंग प्रणाली है जो हर डिवाइस पर एक जैसी दिखती है, जबकि कृतिदेव एक फ़ॉन्ट है जिसमें अंग्रेज़ी कुंजियों पर हिंदी अक्षर बैठाए जाते हैं। यूनिकोड इंटरनेट, सर्च और मोबाइल के लिए उपयुक्त है, जबकि कृतिदेव मुख्य रूप से पुराने दस्तावेज़ों और प्रिंटिंग में उपयोग होता है।

हिंदी में टाइप करते समय अक्सर यह सवाल उठता है कि कृतिदेव और यूनिकोड में से कौन-सा चुनें। दोनों की अपनी जगह और उपयोगिता है। इस लेख में हम इनके अंतर को आसान भाषा में समझाएँगे।

यूनिकोड कैसे काम करता है

यूनिकोड एक अंतरराष्ट्रीय मानक है जिसमें दुनिया की लगभग हर भाषा के हर अक्षर के लिए एक निश्चित और अनूठा कोड तय है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यूनिकोड में लिखा टेक्स्ट हर कंप्यूटर, मोबाइल और वेबसाइट पर बिल्कुल एक जैसा दिखता है, चाहे वहाँ कोई विशेष फ़ॉन्ट इंस्टॉल हो या न हो। यही कारण है कि इंटरनेट, ईमेल और सोशल मीडिया पर हिंदी अब यूनिकोड में ही लिखी जाती है।

कृतिदेव कैसे काम करता है

कृतिदेव यूनिकोड की तरह मानक नहीं, बल्कि एक फ़ॉन्ट है। इसमें अंग्रेज़ी कीबोर्ड की कुंजियों पर हिंदी के अक्षर और मात्राएँ बैठाई जाती हैं। जब आप कृतिदेव फ़ॉन्ट चुनकर टाइप करते हैं, तो अंग्रेज़ी अक्षरों की जगह हिंदी अक्षर दिखते हैं। परंतु यदि वही टेक्स्ट किसी ऐसे स्थान पर खोला जाए जहाँ कृतिदेव फ़ॉन्ट न हो, तो वह बिखरे अंग्रेज़ी अक्षरों जैसा दिखने लगता है। यही इसकी सबसे बड़ी सीमा है।

खोज और नकल-चिपकाने में अंतर

एक बड़ा व्यावहारिक अंतर खोज यानी सर्च में दिखता है। यूनिकोड टेक्स्ट को इंटरनेट पर या दस्तावेज़ में आसानी से खोजा जा सकता है, क्योंकि हर अक्षर का कोड मानक है। कृतिदेव टेक्स्ट खोज में ठीक से काम नहीं करता, क्योंकि उसमें अक्षर वास्तव में अंग्रेज़ी कुंजियों से जुड़े होते हैं। इसी तरह यूनिकोड टेक्स्ट को कहीं भी कॉपी-पेस्ट करना सरल है, जबकि कृतिदेव टेक्स्ट को सही दिखाने के लिए वही फ़ॉन्ट होना ज़रूरी है।

किसका उपयोग कहाँ उपयुक्त है

दोनों की उपयोगिता उनके संदर्भ पर निर्भर करती है। यदि आप वेबसाइट, ब्लॉग, ईमेल, मोबाइल संदेश या ऐसा कोई काम कर रहे हैं जो इंटरनेट से जुड़ा है, तो यूनिकोड सबसे उपयुक्त है, क्योंकि वह हर जगह सही दिखता है और खोजा जा सकता है। वहीं यदि आपको किसी पुराने सरकारी प्रपत्र, प्रिंटिंग टेम्पलेट या ऐसी फ़ाइल के साथ काम करना है जो पहले से कृतिदेव में बनी है, तो कृतिदेव का उपयोग करना पड़ेगा ताकि सामग्री मेल खाए।

एक से दूसरे में बदलना

चूँकि दोनों प्रणालियाँ अलग हैं, इसलिए यूनिकोड और कृतिदेव के बीच सीधे कॉपी-पेस्ट काम नहीं करता। इसके लिए एक कन्वर्टर की आवश्यकता होती है, जो एक प्रणाली के अक्षरों को दूसरी प्रणाली के अनुरूप बदल देता है। ऑनलाइन कन्वर्टर की मदद से आप कुछ ही पलों में यूनिकोड को कृतिदेव में या कृतिदेव को यूनिकोड में बदल सकते हैं, जिससे पुरानी और नई दोनों तरह की फ़ाइलों के साथ काम करना आसान हो जाता है।

सही विकल्प कैसे चुनें

निर्णय लेने का सरल तरीका यह है कि आप सोचें कि टेक्स्ट कहाँ उपयोग होगा। यदि वह डिजिटल दुनिया के लिए है और भविष्य में भी उपयोग होगा, तो यूनिकोड चुनें, क्योंकि वही आधुनिक और टिकाऊ मानक है। यदि वह किसी मौजूदा कृतिदेव आधारित काम का हिस्सा है, तो कृतिदेव चुनें और ज़रूरत पड़ने पर कन्वर्टर से बदलाव करें। इस तरह आप दोनों प्रणालियों का सही और समझदारी से उपयोग कर पाएँगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृतिदेव और यूनिकोड में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

यूनिकोड एक मानक अक्षर-कोडिंग है जो हर डिवाइस पर एक जैसी दिखती है, जबकि कृतिदेव एक फ़ॉन्ट है जिसे सही दिखने के लिए उसी फ़ॉन्ट की आवश्यकता होती है।

इंटरनेट के लिए कौन-सा बेहतर है?

यूनिकोड बेहतर है, क्योंकि वह हर वेबसाइट और डिवाइस पर सही दिखता है और उसे आसानी से खोजा जा सकता है।

क्या दोनों के बीच बदलाव संभव है?

हाँ। ऑनलाइन कन्वर्टर की मदद से यूनिकोड को कृतिदेव में और कृतिदेव को यूनिकोड में आसानी से बदला जा सकता है।