यूनिकोड से कृतिदेव में कैसे बदलें: आसान तरीका
संक्षिप्त उत्तर: यूनिकोड हिंदी टेक्स्ट को कृतिदेव में बदलने के लिए, अपना यूनिकोड टेक्स्ट कन्वर्टर बॉक्स में पेस्ट करें और बदलें बटन दबाएँ। कुछ ही पलों में आपको कृतिदेव फ़ॉर्मेट में टेक्स्ट मिल जाएगा, जिसे आप कॉपी करके अपने दस्तावेज़ में उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए किसी सॉफ़्टवेयर को इंस्टॉल करने की आवश्यकता नहीं होती।
कई सरकारी कार्यालयों, पुराने दस्तावेज़ों और प्रिंटिंग कार्यों में आज भी कृतिदेव फ़ॉन्ट का उपयोग होता है। इसलिए यूनिकोड में टाइप किए गए टेक्स्ट को कृतिदेव में बदलने की ज़रूरत अक्सर पड़ती है। इस लेख में हम यह प्रक्रिया सरल शब्दों में समझाएँगे।
यूनिकोड और कृतिदेव क्यों अलग हैं
यूनिकोड एक अंतरराष्ट्रीय मानक है जिसमें हर अक्षर का एक निश्चित कोड होता है, इसलिए यह हर डिवाइस और वेबसाइट पर एक जैसा दिखता है। दूसरी ओर, कृतिदेव एक फ़ॉन्ट-आधारित प्रणाली है, जहाँ अंग्रेज़ी कीबोर्ड की कुंजियों पर हिंदी अक्षर बैठाए जाते हैं। यही कारण है कि यूनिकोड टेक्स्ट को सीधे कृतिदेव में चिपकाने पर वह गलत दिखता है, और उसे बदलने के लिए एक कन्वर्टर की आवश्यकता होती है।
ऑनलाइन कन्वर्टर से बदलने के चरण
प्रक्रिया बहुत सरल है। सबसे पहले कन्वर्टर टूल का पेज खोलें। फिर अपना यूनिकोड हिंदी टेक्स्ट कॉपी करके इनपुट बॉक्स में पेस्ट करें। इसके बाद बदलें या कन्वर्ट बटन दबाएँ। कुछ ही पलों में दूसरे बॉक्स में कृतिदेव फ़ॉर्मेट का टेक्स्ट दिखाई देगा। अंत में उस टेक्स्ट को कॉपी करके अपने वर्ड दस्तावेज़ या डिज़ाइन फ़ाइल में चिपका दें, और कृतिदेव फ़ॉन्ट चुन लें ताकि वह सही ढंग से दिखे।
कृतिदेव फ़ॉन्ट का सही उपयोग
बदला हुआ टेक्स्ट तभी सही दिखेगा जब आपके दस्तावेज़ में कृतिदेव फ़ॉन्ट इंस्टॉल और चयनित हो। यदि आपके कंप्यूटर में यह फ़ॉन्ट नहीं है, तो आपको इसे इंस्टॉल करना होगा, अन्यथा अक्षर अंग्रेज़ी में बिखरे हुए दिखेंगे। इसलिए कन्वर्ट करने से पहले सुनिश्चित करें कि जिस जगह आप टेक्स्ट का उपयोग कर रहे हैं, वहाँ कृतिदेव फ़ॉन्ट उपलब्ध है, वरना परिणाम गलत प्रतीत होगा।
सामान्य गलतियाँ और उनसे बचाव
कुछ आम गलतियाँ अक्सर होती हैं। पहली, बिना कृतिदेव फ़ॉन्ट चुने टेक्स्ट पेस्ट करना, जिससे अक्षर अंग्रेज़ी के जैसे दिखते हैं। दूसरी, आधे अक्षरों और मात्राओं का ध्यान न रखना, क्योंकि जटिल शब्दों में कभी-कभी थोड़ा सुधार करना पड़ता है। तीसरी, बहुत बड़ा टेक्स्ट एक साथ बदलना, जिससे कुछ हिस्से छूट सकते हैं। बेहतर है कि टेक्स्ट को छोटे भागों में बदलें और हर भाग की जाँच कर लें।
कब कृतिदेव की आवश्यकता होती है
यूनिकोड आज का मानक है, फिर भी कृतिदेव की ज़रूरत कई जगह बनी रहती है। पुराने सरकारी दस्तावेज़, कुछ विभागों के तयशुदा प्रपत्र, समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं की पुरानी डिज़ाइन फ़ाइलें, तथा प्रिंटिंग प्रेस के कई पुराने टेम्पलेट अब भी कृतिदेव में बने होते हैं। ऐसे में यूनिकोड में टाइप की गई सामग्री को कृतिदेव में बदलना पड़ता है ताकि वह मौजूदा फ़ाइलों के साथ मेल खाए।
बदलने के बाद जाँच करना
टेक्स्ट बदलने के बाद उसे ध्यान से पढ़ना ज़रूरी है। कभी-कभी विशेष अक्षरों, संयुक्ताक्षरों या अंकों में छोटी-मोटी गड़बड़ी रह जाती है। इसलिए पूरे दस्तावेज़ को एक बार पढ़ लें और सुनिश्चित करें कि सभी शब्द सही दिख रहे हैं। यदि कोई अक्षर गलत लगे, तो उस हिस्से को दोबारा बदलें या हाथ से ठीक कर लें। थोड़ी-सी जाँच से अंतिम परिणाम पूरी तरह साफ़ और उपयोग के लिए तैयार हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या यूनिकोड से कृतिदेव बदलने के लिए सॉफ़्टवेयर चाहिए?
नहीं। ऑनलाइन कन्वर्टर ब्राउज़र में ही काम करता है, इसलिए किसी सॉफ़्टवेयर को इंस्टॉल करने की आवश्यकता नहीं। बस टेक्स्ट पेस्ट करें और बदलें बटन दबाएँ।
बदलने के बाद अक्षर अंग्रेज़ी में क्यों दिखते हैं?
क्योंकि आपके दस्तावेज़ में कृतिदेव फ़ॉन्ट चयनित नहीं है। कृतिदेव फ़ॉन्ट इंस्टॉल करें और उसे चुनें, तब टेक्स्ट सही हिंदी में दिखेगा।
क्या कृतिदेव अब भी उपयोग होता है?
हाँ। कई सरकारी दस्तावेज़ों, पुराने प्रपत्रों और प्रिंटिंग फ़ाइलों में आज भी कृतिदेव फ़ॉन्ट का उपयोग होता है, इसलिए रूपांतरण की ज़रूरत बनी रहती है।